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गंगा किनारे जैसे सवेरा
पानी में बहती फूलों सा चेहरा
गलियों की हलचल रौनक़ शहर की तू
तेरे मेरे हैं मिलते सितारे
मिलते सितारे सारे के सारे
बोले मोहल्ला रौनक़ शहर की तू
तेरी चाहत की धुन में हूँ धुंधलाया मैं
लो मस्ताया मस्ताया मस्ताया मैं
तेरी खातिर ज़माने में मैं आया
हाँ आया मैं
मैंने बिन तेरे कई दिन काटे
पूरे हो चाहत के घाटे
पाने की तुझको थोड़ी जल्दी है
हो मैंने बिन तेरे कई दिन काटे
बातों से भर मेरे सन्नाटे
पाने की तुझको थोड़ी जल्दी है
तेरी धुंध धुंध में, डूब डूब में
बन मलंग मैं मस्ताया
धुंध धुंध में, डूब डूब में
बन पतंग मैं पगलाया
धुंध धुंध में, डूब डूब में
मस्ताया मस्ताया मैं
पगलाया मैं
तेरी धुंध धुंध में, डूब डूब में
बन मलंग मैं मस्ताया
धुंध धुंध में, डूब डूब में
बन पतंग मैं पगलाया
धुंध धुंध में, डूब डूब में
मस्ताया मस्ताया मैं
पगलाया मैं
ओ हो हो
चारों ही दिशाओं में हूँ
थोड़ा सा हवाओं में हूँ
या मैं तेरी बातों में हूँ
या मैं तेरी बाहों में हूँ
जैसे हो नदी तू कोई
तुझ में ही डूबा मैं रहूँ
घड़ी घड़ी घड़ी देखूं
तेज़ी से वो घड़ी आए
ख़्वाहिशों के फूलों पे
जो मेरी तितली को लाए
ऐसे भी लगे कि थमा
चलना ही भूला है समां
तेरी चाहत की धुन में हूँ धुंधलाया मैं
लो मस्ताया मस्ताया मस्ताया मैं
तेरी खातिर ज़माने में मैं आया
हाँ आया मैं
मैंने बिन तेरे कई दिन काटे
पूरे हो चाहत के घाटे
पाने की तुझको थोड़ी जल्दी है
हो मैंने बिन तेरे कई दिन काटे
बातों से भर मेरे सन्नाटे
पाने की तुझको थोड़ी जल्दी है
ये ख़्वाहिश ये कोशिश
रंग लाए दिल मिलाए
कोई दूरी कोई देरी ना रहे
हो मैं अक्सर ही तड़प कर
मांगता हूँ ये दुआएं
कोई दूरी कोई देरी ना रहे
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